Categories
द्वितीय वर्ष यूनिट 2

भारतीय संविधान में राजभाषा संबंधी अधिनियम एवं राष्ट्रपति के आदेश

भारतीय संविधान में राजभाषा हिन्दी को 14 सितंबर,1949 को शामिल किया गया तथा संविधान के लागू होने के साथ ही हिन्दी समस्त भारत की राजभाषा बन गई| मूल संविधान के ‘395’ अनुच्छेदों में ‘11’ अनुच्छेद भाषा से संबंधित हैं| संविधान के 2,6 एवं 17 वें भाग में राजभाषा संबंधी प्रावधान हैं | इनमें भाग ‘2’ के अनुच्छेद ‘120’ में ‘संसद की भाषा’ तथा ‘6’ भाग के अनुच्छेद ‘210’ में ‘राज्य की भाषा’ संबंधी प्रावधान हैं| 17 वें भाग में 345-351 अनुच्छेद हैं जिसमें राजभाषा हिन्दी के लागू होने से व्यापक प्रसार-प्रचार तक के प्रावधान सम्मिलित हैं |

            हिन्दी के राजभाषा बनने के बाद इसके विकास हेतु अनेक अधिनियम पारित किए गए साथ ही राष्ट्रपति द्वारा इसके प्रचार-प्रसार हेतु अनेक आदेश दिए गए | इन अधिनियमों एवं आदेशों का वर्णन इस प्रकार है:-

1) राष्ट्रपति आदेश (1952)

                        ‘343’ अनुच्छेद में वर्णित राजभाषा हिन्दी लिपि देवनागरी और अंतर्राष्ट्रीय अंकों के प्रयोग संबंधी प्रावधान के अनुसार राष्ट्रपति ने 27 मई ,1952 को यह आदेश जारी किया कि राज्य के राज्यपाल , उच्चतम न्यायालय के न्यायधीश, उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के नियुक्तियों संबंधी अधिपत्रों में संघ द्वारा अंग्रेजी के साथ-साथ हिन्दी भाषा तथा भारतीय अंकों का अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप प्राधिकृत किया जाएगा |

“ राष्ट्रपति उक्त कालावधी में, आदेश द्वारा, संघ के राजकीय प्रयोजनों में से किसी के लिए अंग्रेजी भाषा के साथ-साथ हिन्दी भाषा तथा भारतीय अंकों के अंतर्राष्ट्रीय रूप के साथ-साथ देवनागरी रूप का प्रयोग प्राधिकृत कर सकेगा | ”  

2) राष्ट्रपति आदेश (1955)

 राष्ट्रपति द्वारा 1955 में हिन्दी के प्रयोजन हेतु भारत सरकार के सभी मंत्रालयों को निम्नलिखित सुझाव दिए गए :-

  • जनता से जो पत्र हिन्दी में प्राप्त हों, उनका उतर सरल व स्पष्ट हिन्दी में दिया जाए |
  • प्रशासनिक रिपोर्टों, सरकारी पत्रिकाओं तथा संसद में प्रस्तुत की जानें वाली रिपोर्ट आदि को अंग्रेजी और हिन्दी में प्रकाशित किया जाए |
  • सरकारी संकल्प तथा विधायी अधिनियम अंग्रेजी और हिन्दी में हों |
  • हिन्दी राज्यों के साथ पत्र-व्यवहार हिन्दी में हो |

3) संसदीय राजभाषा समिति (1957)

                             16 नवंबर 1957 को ‘संसदीय राजभाषा समिति’ की पहली बैठक केंद्रीय गृह मंत्री श्री वल्लभ पंत की अध्यक्षता में हुई | इस समिति के निम्नलिखित सुझाव थे :-

  • सरकारी पदों और नौकरियों हेतु अंग्रेजी शिक्षण स्तर के मुकाबले हिन्दी शिक्षण स्तर कम भी हो सकता है |
  • निर्धारित समय में कर्मचारियों को हिन्दी प्रशिक्षण।
  • संसद में विधि निर्माण अंग्रेजी में |
  • राज्यों में विधि-निर्माण राज्यों की राजभाषा में।
  • अखिल भारतीय तथा उच्च स्तरीय परीक्षाओं का पहला माध्यम अंग्रेजी तथा वैकल्पिक माध्यम हिन्दी |

4) राष्ट्रपति आदेश (1960)

                      27 अप्रैल 1960 को राष्ट्रपति ने संघ की राजभाषा संबंधी निम्नलिखित आदेश दिए :-

  • हिन्दी भाषा में वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावलियों का निर्माण |
  • सभी प्रशासनिक साहित्य का हिन्दी अनुवाद
  • शिक्षा मंत्रालय द्वारा हिन्दी प्रचार-प्रसार की व्यवस्था |
  • प्रशिक्षण-संस्थाओं में प्रवेश हेतु अंग्रेजी और हिन्दी दोनों ही शिक्षण माध्यम रहे |
  • संसदीय अधिनियम और विधेयक अंग्रेजी में बनते रहें किन्तु उनका प्राधिकृत हिन्दी-अनुवाद उपलब्ध करवाए जाएं |
  • उच्चतम न्यायालय की भाषा अतंत: होनी चाहिए
  • विधि शब्दकोश, हिन्दी में कानून बनाने तथा कानूनी शब्दावली का निर्माण किया जाए |
  • केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों को हिन्दी का प्रशिक्षण दिया जाए |

5) राजभाषा अधिनियम (1963)

                               राजभाषा आयोग (1955) ने 1956 में राष्ट्रपति के समक्ष अपना मत रखा जिसके परिणामस्वरूप दक्षिण भारत में हिन्दी को राजभाषा बनाए जाने का विरोध हुआ | फलस्वरूप राजभाषा के संबंध में तुष्टीकरण हेतु ‘1963 अधिनियम’ आया | यह अधिनियम “उन भाषाओं का जो संघ के राजकीय प्रयोजनों, संसद में कार्य के सव्यवहार, केंद्रीय और राज्य अधिनियमों और उच्च न्यायालयों ने कतिपय प्रयोजनों के लिए प्रयोग में लाई जाएंगी, उपबंध करने का अधिनियम था | इस प्रकार 26 जनवरी, 1965 से राजभाषा अधिनियम, 1963 के अनुसार सरकारी कार्यालयों, प्रतिष्ठानों आदि में द्विभाषिक स्थिति का प्रारंभ हुआ |

6) राजभाषा अधिनियम (1967)

                          राजभाषा संशोधन विधेयक, 1967 लोकसभा में 27 नवंबर, 1967 को पेश किया गया और 16 दिसंबर,1967 को लोकसभा ने उसे पारित कर दिया | राज्यसभा में यह विधेयक 22 दिसंबर 1967 तथा राष्ट्रपति द्वारा 8 जनवरी, 1968 को पारित किया गया | इस संशोधन के अनुसार :-

  • 15 वर्षों की अवधि समाप्त होने के उपरांत भी अंग्रेजी संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए और संसद में प्रयोग के लिए बनी रहेगी |
  • जिन राज्यों ने हिन्दी को राजभाषा नहीं बनाया है उनके साथ पत्र-व्यवहार हिन्दी और अंग्रेजी दोनों में किया जाएगा |
  • केंद्रीय सरकार हिन्दी के प्रचार-प्रसार हेतु व्यापक प्रयास करेगी |
  • केंद्रीय सेवाओं हेतु हिन्दी और अंग्रेजी का ज्ञान अनिवार्य हो |

7) राजभाषा अधिनियम (1976)

                     28 जून 1976 को राजभाषा अधिनियम, 1976 पारित किया गया | इसके अनुसार :-

  • केंद्रीय सरकार के कार्यालयों से पत्र आदि हिन्दी भाषी राज्यों जिन्हे ‘क’ वर्ग में रखा गया है (उतर प्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार, झारखंड, छतीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और संघ राज्य दिल्ली ) के साथ पत्र व्यवहार हिन्दी में किया जाएगा |
  • ‘ख’ वर्ग के राज्यों ( पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र, चंडीगढ़, और अंडमान निकोबार द्वीप समूह के साथ पत्र व्यवहार हिन्दी और अंग्रेजी में होगा |
  • ‘ग’ क्षेत्र के राज्य अर्थात अहिंदी भाषी राज्यों को पत्र अंग्रेजी में भेजे जाएंगे |
  • हिन्दी में प्राप्त पत्रों का उत्तर हिन्दी में दिया जाएगा |
  • केंद्रीय सरकार के मैनुअल, संहिताएं, सूचनापट्ट, नामपट्ट, रजिस्टरों में शीर्ष हिन्दी और अंग्रेजी में तैयार किए जाएंगे |
  • सभी कर्मचारियों का हिन्दी प्रशिक्षण अनिवार्य होगा |

निष्कर्ष :

अत: स्पष्ट है कि केंद्रीय सरकार की बराबर यह नीति रही है कि हिन्दी को संघ की राजभाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने के लिए समुचित कार्यवाही की जाए | परंतु द्विभाषिक स्थिती का भी ध्यान बराबर रखा गया है | अंग्रेजी भाषा के प्रयोग में जो कानूनी व्यवस्थाएं हैं उनकी भी पूरी-पूरी अनुपालना की जा रही है।

पी डी एफ डाउनलोड करें

Leave a Reply

Your email address will not be published.