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बी.ए. तृतीय वर्ष (DSE-1)

लोकगीत से क्या अभिप्राय है? लोकगीतों की प्रमुख विशेषताएं बताते हुए उसके विभिन्न प्रकारों पर प्रकाश डालिए।

लोक साहित्य के अंतर्गत लोकगीत सर्व प्रसिद्ध व सर्व प्रमुख प्रकार है।लोकगीतों में जनसामान्य के भाव और अनुभूतियों की व्यापकता सहज रूप से प्राप्त होती है। लोक साहित्य का लगभग अधिकांश भाग लोकगीतों में ही समाया हुआ है।आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने लोकगीतों को आर्य सभ्यता की वेद श्रुति कहकर इन्हें वेदों के समान पवित्र […]

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Unit 1 Lok Sahitya बी.ए. तृतीय वर्ष (DSE-1)

लोक साहित्य के प्रकार

लोक साहित्य किसी भी समाज वर्ग या समूह के सामूहिक जीवन का दर्पण होता है।इसमें किसी व्यक्ति विशेष का चिंतन मानव विवेचन विश्लेषण नहीं होता बल्कि सामूहिक चेतना अनुभवों, संवेदनाओं की अभिव्यक्ति रहती है। किसी भी समाज के इतिहास और संस्कृति को भली-भांति समझने के लिए लोक साहित्य का अध्ययन आवश्यक है। लोक साहित्य में […]

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लोक साहित्य का महत्त्व

मानव को अनुरंजित व आनंदित करने वाले लोक साहित्य की परम्पराएँ प्रत्येक देश व समाज में पाई जाती हैं। लोक साहित्य द्वारा ही युग -युग की आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक व सांस्कृतिक परिस्थितियों का परिचय मिलता है। एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक तथा एक समुदाय से दूसरे समुदाय तक पहुंचने वाले लोक साहित्य की परम्पराएँ […]

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लोक साहित्य के संकलन एवं संरक्षण में आने वाली कठिनाईयां

मनुष्य सामाजिक प्राणी है। जो उसने देखा, महससु किया उसे कविता में विरोया। इसी प्रकार साहित्य का जन्म हुआ। मोटे तौर पर साहित्य के दो प्रकार होते हैं-एक शिष्ट-सुसंस्कृत साहित्य जो शिक्षित लोगों से रचित होता है और लिपिबद्ध होता है उसे शिष्ट साहित्य या परिनिष्ठित साहित्य कहा जाता है। दूसरा साहित्य वह है जो […]

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लोक साहित्य के अध्ययन की प्रक्रिया

 लोक साहित्य जनमानस की उपज है। इसमें लोक का मानस, लोक जीवन और लोक का भाव जगत् स्पष्ट रुप से परिलक्षित होता है। लोक साहित्य लोक संस्कृति का अभिन्न अंग है। इसका अध्ययन करने के लिए लोक संस्कृति के प्रत्येक पहलु को समझना आवश्यक है। जब हम किसी समाज की लोक-संस्कृति का अध्ययन करते है […]

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लोक साहित्य का अध्ययन करने वाले विभिन्न विद्वानों का परिचय

लोक साहित्य की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि यहां मौखिक रूप में उपलब्ध है।  पिछले अनेक वर्षों में अनेक विद्वान लोक साहित्य को लिखित रूप में लाने के लिए प्रयास कर रहे हैं।  अनेक विद्वानों ने न केवल लोक साहित्य विषयक आलोचना की है अपितु देश भर में बिखरे पड़े लोक साहित्य को संकलित […]

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लोक संस्कृति की अवधारणा स्पष्ट करते हुए लोक संस्कृति और लोक साहित्य का संबंध स्पष्ट करें

संस्कृति ब्रम्हा की भांति अवर्णनीय है| वह व्यापक, अनेक तत्वों का बोध कराने वाली, जीवन की विविध प्रवृतियों से संबंधित है| अत: विविध अर्थों व भावों में उसका प्रयोग होता है| मानव मन की बाहरी प्रवृतियों से जिस भी किसी चीज का विकास हुआ है वह सभ्यता है और उसकी आंतरिक प्रवृतियों से जो कुछ […]

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लोक साहित्य का स्वरूप और विशेषताएँ

लोक साहित्य वह साहित्य है जो जनमानस की चित्तवृत्तियों से संबंधित है।  यह मानव मन की उपज है। लोक साहित्य शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है  लोक और साहित्य।  लोक का अर्थ है जन सामान्य वर्ग और साहित्य का अर्थ है उस जन सामान्य वर्ग की संपूर्ण भावनाओं की अभिव्यक्ति।  लोक साहित्य किसी भी […]

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लोक साहित्य का अर्थ एवं परिभाषाएँ।

साहित्य मानव मन की प्रतिछवि है।  यह मानव मन में आने वाले भाव,  उतार-चढ़ाव,  सामाजिक स्थितियों तथा विभिन्न परिस्थितियों का उद्घाटन करने का माध्यम है। साहित्य को दो वर्गों में विभाजित किया गया है, शिष्ट साहित्य और लोक साहित्य।  लोक साहित्य वास्तव में एक लोक जीवन की उपज है।            लोक साहित्य से अभिप्राय उस साहित्य […]