Categories
बी.ए. तृतीय वर्ष (DSE-1)

नौटंकी लोकनाटक की प्रमुख विशेषताएं बताइए

नौटंकी उतर भारत, पाकिस्तान और नेपाल के एक लोकनृत्य और नाटक शैली का नाम है| यह भारतीय उपमहाद्वीप में प्राचीन का से चली आ रही स्वांग परंपरा की वंशज है| नौटंकी नामकरण एक ऐतिहासिक राजकुमारी नौटंकी पर आधारित प्रसिद्ध नृत्य नाटक शहजादी नौटंकी के नाम पर पड़ा| Read More

Categories
बी.ए. तृतीय वर्ष (DSE-1)

जात्रा लोकनाट्य का परिचय दीजिए

लोक नृत्य में जात्रा भारत के पूर्वी क्षेत्र का लोक कलामंच का एक लोकप्रिय रूप है| यह कई व्यक्तियों द्वारा किया जाने वाला एक नाट्य अभिनय है जिसमें संगीत, अभिनय,गायन और नाटकीय वाद-विवाद होता है| विशेष रूप से यह लोकनाटक बंगाल और उड़ीसा में विशेष रूप से उल्लेखनीय है Read More

Categories
बी.ए. तृतीय वर्ष (DSE-1)

कथकली लोकनाट्य का परिचय दीजिए

कथकली नृत्य या नृत्य नाटक का ही एक रूप है| यह केरल राज्य की एक शास्त्रीय नृत्य परंपरा है| इस नृत्य नाटक को रंगकला भी कहा जाता है| यह केरल के दक्षिण-पशिचमी भाग जैसे मालाबार, कोचीन और त्रावणकोर के आसपास प्रचलित है

Categories
बी.ए. तृतीय वर्ष (DSE-1)

तमाशा लोकनाटक का परिचय

तमाशा मूलतः महाराष्ट्र की लोकनाट्य विधा है|इसके साथ ही राजस्थान के जयपुर में भी तमाशे की गौरवशाली परंपरा है|लगभग ३०० वर्ष पूर्व यह लोकनाट्य महाराजा प्रताप सिंह के काल में प्रारंभ हुआ| इसके खिलाड़ी तमाशे को लेकर महाराष्ट्र से ही आए थे Read More….

Categories
बी.ए. तृतीय वर्ष (DSE-1)

भवाई लोकनाट्य का स्वरूप एवं विशेषताएं बताइए

भवाई लोकनाट्य सामूहिक नृत्य नाटक का एक रूप है| यह गुजरात राज्य का सर्वप्रसिद्ध लोक नाट्य है| गुजरात का यह नृत्य नाटक निम्न जातियों विशेषकर कोलियों में सर्वाधिक लोकप्रिय रहा है Read More….

Categories
बी.ए. तृतीय वर्ष (DSE-1)

यक्षगान’ नाट्य शैली का वर्णन कीजिए

यक्षगान कर्नाटक राज्य की एक सांप्रदायिक, पारंपरिक नाट्य और नृत्य शैली है| यह लोककला का समृद्ध वाहक है| यह नाट्य एक प्रशंसनीय शास्त्रीय पृष्टभूमि के साथ किया जाता है… Read More

Categories
Unit 1 Lok Sahitya बी.ए. तृतीय वर्ष (DSE-1)

लोक नाटकों में स्वांग लोकनाट्य

‘स्वांग’ लोक नाट्य परंपरा का एक महत्वपूर्ण एवं मनोरंजक प्रकार है। भारत के उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा राज्य में स्वांग लोकनाट्य की परंपरा प्रसिद्ध है। लोकनाट्यों में प्रहसनात्मक, संगीत, नृत्य एवं अभिनय प्रधान नाटकों को स्वांग का नाम दिया गया है।स्वांग का अर्थ है नकल करना अथवा नाटक करना। Read More…..

Categories
बी.ए. तृतीय वर्ष (DSE-1)

लोकनाट्य के रूप में रामलीला के स्वरूप एवं इतिहास को स्पष्ट करें

रामलीला उतरी भारत का सर्वाधिक लोकप्रिय एवं महत्वपूर्ण लोकनाट्य है | ‘हरि अनंत, हरि कथा अनंत’ की भाँति राम और राम की लीला की कथा सर्वप्रसिद्ध है| राम की कथा का विस्तार भारत में ही नहीं, संपूर्ण दक्षिण पूर्वी एशिया तक देखा जा सकता है | Read More

Categories
Unit 1 Lok Sahitya बी.ए. तृतीय वर्ष (DSE-1)

लोकनाटक का अर्थ एवं विशेषताएं

लोक नाटक या लोकनाट्य लोक साहित्य की सर्वाधिक लोकप्रिय विधा है लोक नाटकों का लोक जीवन से अत्यंत घनिष्ठ संबंध है। लोक नाटक दो शब्दों के योग से बना है ‘लोक’+’नाटक’। जब कोई कृति नाट्य रूप में कथावृत को प्रस्तुत करती है उसे नाटक कहा जाता है परंतु जब जनसमूह या लोक द्वारा अपनाई गई […]

Categories
Unit 1 Lok Sahitya बी.ए. तृतीय वर्ष (DSE-1)

ऋतुगीत

लोकगीतों का प्रकृति के साथ गहरा संबंध है। लोकगीतों का जन्म तब हुआ जब शहरी सभ्यता का विकास नहीं हुआ था और सामान्यतः लोग प्रकृति के प्रांगण में निर्द्वंद्व विचरण करते थे। भारतवर्ष में प्रकृति छह बार अपना रूप परिवर्तित करती है जिससे ऋतु की संज्ञा दी जाती है। यहाँ छह ऋतुओं में ग्रीष्म, वर्षा, […]