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बी.ए. तृतीय वर्ष (GE-1)

मार्क्सवादी दर्शन का भारतीय साहित्य पर क्या प्रभाव पड़ा ?

मार्क्सवाद एक वैज्ञानिक विचारधारा है जिसके प्रणेता कार्ल मार्क्स थे|

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आस्तित्ववादी अवधारणा को स्पष्ट करते हुए भारतीय साहित्य पर इसके प्रभाव को स्पष्ट करें

जब कोई सिद्धांत बहुतायत में प्रचारित हो जाता है तो वह “वाद” बन जाता है | मनुष्य का जीवन परिस्थितियों से प्रभावित होता है| “आस्तित्ववाद” एक ऐसी विचारधारा है जिसमें आस्तित्व को तत्व से ऊपर समझा जाता है|

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महात्मा गाँधी के विचारों का भारतीय साहित्य पर क्या प्रभाव पड़ा?

महात्मा गांधी की विचार पद्धति का नाम गाँधीवाद है| उनकी यह विचारधारा आजीवन सत्य के साथ किए गए प्रयोगों पर आधारित है जो अनुभव के सत्य से सिद्ध हुई है| पाँच दशक तक अपने सार्वजनिक जीवन में जो अनुभव उन्हे प्राप्त हुए और जो प्रयोग उन्होंने मानव हित के लिए किए, उनसे जो निष्कर्ष निकाले […]

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भारतीय साहित्य में राष्ट्रीय चेतना पर प्रकाश डालिए

भारतीय साहित्य में “राष्ट्र” शब्द का प्रयोग वैदिक काल से ही होता रहा है| मानव की सहज सामुदायिक भावना ने समूह को जन्म दिया, जो कालांतर में राष्ट के रूप में स्थापित हुआ| राष्ट्र एक समुच्चय है, कुलक है, और राष्टीयता एक विशिस्ट भावना है| जिस जन समुदाय में एकता की एक सहज लहर हो, […]

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1857 क्रांति का भारतीय साहित्य पर प्रभाव

1857 क्रांति का भारतीय साहित्य पर प्रभाव यास्वाधीनता संग्राम का भारतीय साहित्य पर प्रभाव समाज तथा राष्ट्र के संदर्भ में कुछ तत्व ऐसे होते हैं जो मनुष्य के जीवन मूल्यों से जुड़े होते हैं।  व्यक्ति की स्वाधीनता भी ऐसा ही एक तत्व है। किसी भी राष्ट्र अथवा व्यक्ति को सदा के लिए पराधीनता की बेडि़यो […]

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नवजागरण का भारतीय साहित्य पर प्रभाव

जागरण का अर्थ है जागृत होना, नींद से जागना, जनमानसिकता में नवचेतना,  स्वतंत्र चिंतन,  ऐसी चेतना जो पहले कभी न आई हो। जागरण शब्द का अर्थ है जब कोई देश, जाति या समाज अपनी वास्तविक परिस्थितियों और उसके कारणों का ज्ञाता हो जाता है एवं  अपनी उन्नति और रक्षा के लिए सचेत हो जाता है। […]