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6 सेमेस्टर यूनिट 1

अज्ञेय द्वारा रचित ‘कलगी बाजरे की’ कविता की विशेषताएँ

अज्ञेय प्रयोगवादी कविता के प्रवर्तक कवि माने जाते हैं| वे हिंदी के ऐसे साहित्यकार हैं जिन्होंने हिंदी की हर विधा को समृद्ध किया| अज्ञेय की रचनाओं की संख्या 50 से अधिक है| उनकी काव्य संबंधी मान्यताएं निश्चित थी| अज्ञेय प्रयोगवाद के प्रवर्तक थे परंतु उनके काव्य पर छायावादी प्रभाव भी कम न था| उनका साहित्य […]

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6 सेमेस्टर यूनिट 4

केदारनाथ सिंह द्वारा रचित कविता ‘फर्क नहीं पड़ता’ की प्रासंगिकता

केदारनाथ सिंह अज्ञेय द्वारा संपादित ‘तीसरा सप्तक के कवि थे| उनकी कविता निराला, नागार्जुन, अज्ञेय, मुक्तिबोध की परंपरा में रखी जाती है| वे इनकी परंपरा के अंतिम समकालीन कवि कहे जा सकते हैं जिनकी कविताएं भारतीय भाषा और संस्कृति की व्यापक चिंताओं से आकार ग्रहण करती हैं| उनके काव्य की विषय वस्तु व्यापक है| हिंदी […]

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सर्वेश्वर दयाल सक्सेना द्वारा रचित कविता ‘मैंने कब कहा’ का सार एवं उदेश्य

सर्वेश्वर दयाल सक्सेना हिंदी साहित्य में सठोत्तरी कविता के कवियों में प्रमुख स्थान रखते हैं| उनका काव्य सामाजिक जागरूकता का काव्य है| वर्तमान समाज की सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक रूढ़ियों का विरोध, आम आदमी की पक्षधरता, लोकोनमुख्ता तथा नवीन साहित्य की कामना उनके काव्य की महत्वपूर्ण विशेषताएं कही जा सकती है| समकालीन सत्य और यथार्थ को […]

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6 सेमेस्टर यूनिट 1

‘यह दीप अकेला’ कविता की विशेषताएँ।

‘यह दीप अकेला’ कविता अज्ञेय द्वारा रचित काव्य संग्रह ‘बावरा अहेरी’ से ली गई है| अज्ञेय पर सदैव साहित्य जगत में यह आरोप लगते रहे कि वे व्यक्तिवादी हैं, क्योंकि प्रयोगवादी काव्यधारा व्यक्ति को ही अधिक महत्व देती रही है तथा समाज की उपेक्षा करती है और अज्ञेय इसी काव्यधारा के प्रवर्तक रहे हैं| यह […]

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6 सेमेस्टर यूनिट 4

सर्वेश्वर दयाल सक्सेना द्वारा रचित कविता ‘हम ले चलेंगे’ का सार और संदेश

सर्वेश्वर दयाल की कविता ‘हम ले चलेंगे’ वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था पर करारा व्यंग्य करती है| राजनीति के कर्णधार मंच से बड़े बड़े वादे कर जनता का विश्वास अर्जित करते हैं और जब उनका स्वार्थ पूरा हो जाता है तब उनके वायदे भी गायब और वायदों में जनकल्याण की बातें भी गायब हो जाती है| वे […]

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कुंवर नारायण द्वारा कविता नचिकेता की वर्तमान संदर्भों में प्रासंगिकता

कुंवर नारायण ‘नई कविता’ आंदोलन के प्रमुख कवि हैं| उन्होंने अपनी कविताओं में इतिहास और पौराणिक मिथकों के जरिए वर्तमान की स्थितियों-परिस्थतियों का विवेचन किया है| अज्ञेय द्वारा संपादित ‘तीसरे सप्तक’ में कुंवर नारायण का स्थान प्रमुख कवि के रूप में हैं| वे बहुभाषाविद् तथा अध्ययनशील प्रवृति के व्यक्ति थे| उनके काव्य में एक ओर […]

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6 सेमेस्टर यूनिट 3

भवानी प्रसाद मिश्र द्वारा रचित कविता कहीं नहीं बचे है

भवानी प्रसाद मिश्र की कविता ‘कहीं नहीं बचे हैं’ वर्तमान समय में पर्यावरण के विनाश की भयावहता का चित्रण करती है| प्रकृति मिश्र जी की कविताओं में सर्वत्र अपने पूरे वैभव के साथ विद्यमान रहती है| प्रकृति के साथ उनका गहरा लगाव है| वर्तमान मानव अपने स्वार्थों की बेदि पर प्रकृति का मनोहारी एवं पालक […]

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6 सेमेस्टर यूनिट 3

भवानी प्रसाद मिश्र द्वारा रचित कविता गीत-फ़रोश की विशेषताएं

‘गीत फ़रोश’ कविता भवानी प्रसाद मिश्र द्वारा रचित अत्यंत महत्वपूर्ण एवं प्रभावशाली कविता है| भवानी प्रसाद मिश्र हिन्दी के प्रसिद्ध कवि और गांधीवाद विचारक के रूप में प्रसिद्ध हैं| वे दूसरे ‘तारसप्तक’ के प्रमुख कवि हैं| वे श्रम के महत्त्व को अपनी कविताओं में प्रतिपादित करते हैं तथा श्रमशील व्यक्तियों का गुणगान करते हैं| उनके […]

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6 सेमेस्टर यूनिट 2

“अकाल और उसके बाद ” कविता का उदेश्य स्पष्ट करें

‘अकाल और उसके बाद’ कविता नागार्जुन द्वारा रचित अत्यंत मार्मिक एवं हृदयग्राही कविता है| इसमें कवि ने अकाल के समय तथा उसके बाद की परिस्थितियों का सजीव अंकन किया है| यह कविता 1952 में रची गई थी| यह कविता देखने में जितनी छोटी और सरल लगती है, अर्थ एवं भावबोध में उतनी ही गहरी एवं […]

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6 सेमेस्टर यूनिट 2

नागार्जुन द्वारा रचित कविता कालिदास का सार व उदेश्य

नागार्जुन प्रगतिवादी काव्यधारा के प्रतिनिधि कवियों में से एक हैं| बाबा नागार्जुन को भावबोध और कविता के मिजाज के स्तर पर सबसे अधिक निराला और कबीर के साथ जोड़कर देखा गया है| नागार्जुन के काव्य में अब तक की पूरी भारतीय काव्य-परंपरा को जीवित रूप में देखा जा सकता है| उनका काव्य अपने समय और […]