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“अकाल और उसके बाद ” कविता का उदेश्य स्पष्ट करें

‘अकाल और उसके बाद’ कविता नागार्जुन द्वारा रचित अत्यंत मार्मिक एवं हृदयग्राही कविता है| इसमें कवि ने अकाल के समय तथा उसके बाद की परिस्थितियों का सजीव अंकन किया है| यह कविता 1952 में रची गई थी| यह कविता देखने में जितनी छोटी और सरल लगती है, अर्थ एवं भावबोध में उतनी ही गहरी एवं […]

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नागार्जुन द्वारा रचित कविता कालिदास का सार व उदेश्य

नागार्जुन प्रगतिवादी काव्यधारा के प्रतिनिधि कवियों में से एक हैं| बाबा नागार्जुन को भावबोध और कविता के मिजाज के स्तर पर सबसे अधिक निराला और कबीर के साथ जोड़कर देखा गया है| नागार्जुन के काव्य में अब तक की पूरी भारतीय काव्य-परंपरा को जीवित रूप में देखा जा सकता है| उनका काव्य अपने समय और […]