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केदारनाथ सिंह द्वारा रचित कविता ‘फर्क नहीं पड़ता’ की प्रासंगिकता

केदारनाथ सिंह अज्ञेय द्वारा संपादित ‘तीसरा सप्तक के कवि थे| उनकी कविता निराला, नागार्जुन, अज्ञेय, मुक्तिबोध की परंपरा में रखी जाती है| वे इनकी परंपरा के अंतिम समकालीन कवि कहे जा सकते हैं जिनकी कविताएं भारतीय भाषा और संस्कृति की व्यापक चिंताओं से आकार ग्रहण करती हैं| उनके काव्य की विषय वस्तु व्यापक है| हिंदी […]

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सर्वेश्वर दयाल सक्सेना द्वारा रचित कविता ‘मैंने कब कहा’ का सार एवं उदेश्य

सर्वेश्वर दयाल सक्सेना हिंदी साहित्य में सठोत्तरी कविता के कवियों में प्रमुख स्थान रखते हैं| उनका काव्य सामाजिक जागरूकता का काव्य है| वर्तमान समाज की सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक रूढ़ियों का विरोध, आम आदमी की पक्षधरता, लोकोनमुख्ता तथा नवीन साहित्य की कामना उनके काव्य की महत्वपूर्ण विशेषताएं कही जा सकती है| समकालीन सत्य और यथार्थ को […]

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सर्वेश्वर दयाल सक्सेना द्वारा रचित कविता ‘हम ले चलेंगे’ का सार और संदेश

सर्वेश्वर दयाल की कविता ‘हम ले चलेंगे’ वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था पर करारा व्यंग्य करती है| राजनीति के कर्णधार मंच से बड़े बड़े वादे कर जनता का विश्वास अर्जित करते हैं और जब उनका स्वार्थ पूरा हो जाता है तब उनके वायदे भी गायब और वायदों में जनकल्याण की बातें भी गायब हो जाती है| वे […]