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बी.ए. प्रथम वर्ष (DSC-1)

रामभक्ति काव्य धारा

हिंदी साहित्य के भक्तिकाल में निर्गुण और सगुण दो काव्यधाराएँ विकसित हुई। सगुण काव्यधारा के अंतर्गत भगवान विष्णु के दो अवतारों कृष्ण और राम को आराध्य मानकर कवियों ने साहित्य सृजन किया। स्वामी वल्लभाचार्य के पुष्टि मार्ग के संरक्षण में कृष्ण भक्ति शाखा पल्लवित-पोषित हुई तो स्वामी रामानंद ने संपूर्ण उत्तरी भारत में रामभक्ति लहर […]

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सूरदास का जीवन परिचय एवं काव्यगत विशेषताएँ

हिंदी के कृष्ण भक्त कवियों में सूरदास का स्थान सर्वोपरि है।सूरदास का जन्म 1478 ई० में रुनकता नामक गाँव में हुआ। यह गाँव मथुरा-आगरा मार्ग के किनारे स्थित है। कुछ विद्वानों का मत है कि सूर का जन्म सीही नामक ग्राम में एक निर्धन सारस्वत ब्राह्मण परिवार में हुआ था। सूरदास नेत्रहीन थे यह तो […]

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अष्टछाप के प्रमुख कवि

भक्तिकाल की सगुण भक्तिधारा में कृ्ष्ण काव्य का विशेष महत्व है। कृष्ण भक्ति काव्य धारा से अभिप्राय उस काव्यधारा से है जिसमें कवियों ने भगवान विष्णु के अवतार कृष्ण के चरित्र को आधार बनाकर अपने काव्य ग्रंथों की रचना की। इस परंपरा के कवियों ने कृष्ण के बाल रूप के एवं उनकी विविध लीलाओं के […]

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कृष्ण काव्य धारा का परिचय एवं काव्यगत विशेषताएं

भारतीय धर्म साधना संस्कृति साहित्य तथा कलाएं कृष्ण के विलक्षण व्यक्तित्व से जिस रूप में प्रभावित हैं उतने वे किसी अन्य चरित्र से नहीं। कृष्ण आख्यान की परंपरा अत्यंत प्राचीन है जो कि भारतीय साहित्य में विविध रूपों में उपलब्ध होती है।  वैदिक तथा संस्कृत साहित्य में कृष्ण के तीन रूप मिलते हैं ऋषि एवं […]

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मलिक मोहम्मद जायसी का जीवन परिचय और काव्यगत विशेषताएँ

मलिक मोहम्मद जायसी हिन्दी साहित्य के भक्ति काल की निर्गुण प्रेमाश्रयी धारा के प्रतिनिधि कवि हैं। वे अत्यंत उच्च कोटि के सरल और उदार सूफ़ी महात्मा थे। हिंदी साहित्य में तुलसीदास और सूरदास के समान ही उनका पर्याप्त महत्त्व है। वे प्रेम की पीर के कवि माने जाते हैं। जायसी के जन्म के संबंध में […]

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सूफी काव्य की प्रमुख विशेषताएं

हिंदी साहित्य में निर्गुण काव्यधारा दो शाखाओं में विभाजित हुई- संत काव्य धारा और सूफी काव्य धारा। सूफी काव्य परंपरा हिंदी साहित्य के भक्ति काल की एक प्रमुख काव्य परंपरा है। भारत के मध्य युग के इतिहास में जहां संत कवियों ने भक्ति के साधारण मार्ग की प्रतिष्ठा की और ईश्वर को ज्ञान और प्रेम […]

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सूफी काव्य धारा एवं प्रमुख सूफी कवि

हिंदी साहित्य में निर्गुण काव्यधारा दो शाखाओं में विभाजित हुई- संत काव्य धारा और सूफी काव्य धारा। सूफी काव्य परंपरा हिंदी साहित्य के भक्ति काल की एक प्रमुख काव्य परंपरा है। भारत के मध्य युग के इतिहास में जहां संत कवियों ने भक्ति के साधारण मार्ग की प्रतिष्ठा की और ईश्वर को ज्ञान और प्रेम […]

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कबीरदास का जीवन परिचय एवं काव्यगत विशेषताएँ

हिंदी साहित्य के इतिहास को चार भागों में विभाजित किया गया है- आदिकाल, भक्ति काल,  रीति काल और आधुनिक  काल। आदिकाल साहित्य का आरंभिक काल था तो वही भक्ति काल को हिंदी साहित्य के स्वर्ण युग की संज्ञा दी गई है।  भक्ति काल में दो काव्य धाराएँ विकसित हुई-  निर्गुण काव्यधारा और सगुण काव्य धारा।  […]

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संत काव्यधारा की विशेषताएँ

हिंदी साहित्य के भक्ति काल में निर्गुण और सगुण दो काव्य धाराएं विकसित हुई। निर्गुण काव्यधारा की दो शाखाओं में विभाजित किया गया संत काव्य धारा तथा सूफी काव्य धारा। संत काव्य धारा को ज्ञानमार्गी या ज्ञानाश्रयी शाखा भी कहा जाता है। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने निर्गुण संत काव्य धारा को निर्गुण ज्ञानाश्रयी शाखा नाम […]

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संत काव्यधारा एवं प्रमुख कवि

हिंदी साहित्य के भक्ति काल में निर्गुण और सगुण दो काव्य धाराएं विकसित हुई। निर्गुण काव्यधारा की दो शाखाओं में विभाजित किया गया संत काव्य धारा तथा सूफी काव्य धारा। संत काव्य धारा को ज्ञानमार्गी या ज्ञानाश्रयी शाखा भी कहा जाता है। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने निर्गुण संत काव्य धारा को निर्गुण ज्ञानाश्रयी शाखा नाम […]