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द्वितीय वर्ष यूनिट 2

हिंदी के विकास की दशा और दिशा

भारत वर्ष में आज लगभग 650 से अधिक जीवित भाषाएँ हैं परंतु भारतवर्ष में आज संपर्क की भाषा के रूप में हिन्दी, अंग्रेजी और स्थानीय भाषाओं को ही प्रयोग में लाया जाता है | हिन्दी भाषा को भारत में तीन चौथाई लोग बोलते और समझते हैं | हिन्दी भारत के 12 राज्यों की प्रथम भाषा और 11 राज्यों में द्वितीय भाषा का दर्जा प्राप्त है | हिन्दी की विशालता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हिंदी 18 बोलियों का एक समूह है | स्थानीय स्तर से लेकर अंतर्राष्ट्रीय वैश्विक स्तर तक अपना स्थान बना रही है | इस हिन्दी भाषा की अस्मिता ने राष्ट्रीय एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है | भारत के स्वतंत्रता संग्राम में हिन्दी ने अपना अमूल्य योगदान दिया है | हिन्दी ने आजादी की लड़ाई में सभी देशवासियों को एकता के सूत्र में बांधकर संजोए रखा और जन-जन के संघर्ष को आवाज दी | इतना महत्व रखने के बावजूद भी हिन्दी को अभी तक पूर्ण रूप से राजभाषा या राष्ट्रभाषा का दर्जा प्राप्त नहीं हुआ है | संवैधानिक तौर पर इसे राजभाषा का स्थान तो दिया गया परंतु व्यवहारिक रूप में स्थिति कुछ और ही रही | वैश्वीकरण के दौर में अंग्रेजी भाषा को अधिक बल मिल रहा है | एक महत्वपूर्ण समस्या यह भी है शोध और अनुसंधान के लिए हिंदी में शोध सामग्री उपलब्ध नहीं है | विज्ञापन बाजार हिन्दी के लिए दिन-प्रतिदिन चुनौतियाँ उत्पन्न कर रहा है | इसके तहत एक वर्ग विशेष को लुभाने के लिए अंग्रेजी में विज्ञापन, उत्पाद का नाम अंग्रेजी में प्रचारित किया जा रहा है | ऐसी स्थिति में हिन्दी के विकास हेतु निम्नलिखित प्रयास किए जा रहे हैं :-

(1) केंद्र सरकार के प्रयास

स्वतंत्रता के बाद हिंदी की संवैधानिक स्थिति के अनुसार हिंदी की अभिवृद्धि, विकास, प्रचार,प्रसार और आगामी और प्रगामी प्रयोग का दायित्व विशेष रूप से भारत सरकार को दिया गया है | केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने स्वैच्छिक हिंदी संस्थाओं को आर्थिक सहायता, हिन्दी अध्यापकों के लिए अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थाओं का खर्च , विश्वविद्यालयों के स्तर की मानक पुस्तकों का हिंदी तथा अन्य भारतीय भाषाओं में अनुवाद और प्रकाशन, विश्वकोश, शब्दकोश तथा अहिंदी भाषी क्षेत्रों में हिंदी के प्रचार-प्रसार की योजनाएँ आदि कार्यक्रम प्रस्तुत किए हैं |

(2) राजभाषा विभाग के कार्य

गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग द्वारा समय-समय पर हिंदी के प्रचार-प्रसार हेतु विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है | उदाहरण के लिए राजभाषा विभाग ने कार्यालयों के लिए कुछ अन्य आदेश भी दिए हैं, जैसे अंग्रेजी टाइपराइटर नहीं है वहाँ कम से कम एक हिंदी टाइपराइटर होना अनिवार्य है | कार्यालय के तार का पता हिंदी तथा अंग्रेजी में होना चाहिए | 14 सितंबर को प्रत्येक वर्ष हिंदी दिवस मनाने का अनुदेश भी राजभाषा विभाग का ही है | केंद्रीय कार्यालय की फ़ाइलें, विजिटिंग कार्ड, मुहरें, समय-सूचक बोर्ड, नामपट्ट सभी हिंदी में होंगे |

(3) राजभाषा को व्यवहारिक रूप में लाना

राजभाषा का स्वरूप तब तक पूर्णत: विकसित नहीं हो पाएगा जब तक राजभाषा को व्यवहार और बोलचाल की भाषा न बनाया जाए | यह भाषा अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है | अत: हिन्दी के माध्यम से युवकों को कौशल प्रशिक्षण दिया जाए | इस बात की ओर भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि लोग अधिक से अधिक हिंदी को व्यवहार में लाए |

(4) अंग्रेजी के वर्चस्व को कम करना

अंग्रेजी भाषा पर निर्भरता कम करके भी हिंदी का विकास किया जा सकता है | आज जापान, चीन इत्यादि राष्ट्र अंग्रेजी ज्ञान के बिना आत्मनिर्भर बन गए | यद्यपि हिंदी के प्रति लोगों के सकीर्ण और संकुचित नजरिए को बदलने की जरूरत है | हिंदी को सरल और व्यवहारिक बनाने के लिए हिंदी को अधिकाधिक तत्सम शब्दावली से दूर रखना चाहिए | हिंदी के भीतर वे सभी गुण विकसित किए जाने की आवश्यकता है जो अंग्रेजी में है |

(5) संचार भाषा के शुद्ध रूप का विकास

आज संचार माध्यमों द्वारा हिंदी विश्व की सर्वाधिक शक्तिशाली भाषाओं में से एक बन चुकी है | वैश्विक क्रम में यह दूसरी सबसे अधिक बोली व समझी जाने वाली भाषा है | रेडियो, टेलीविजन, सिनेमा, इंटरनेट आदि ने इसके प्रचार-प्रसार में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है | समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं तथा विज्ञापनों में हिन्दी का ही वर्चस्व है | परंतु इन माध्यमों में जिस तरह की हिंदी प्रयुक्त हो रही है वह अपना शुद्ध रूप लिए हुए नहीं है | ‘हिंगलिश’ उसका मिश्रित स्वरूप है | इन संचार माध्यमों में हिन्दी के शुद्ध रूप का विकास किया जाना आवश्यक है |

(6) प्रामाणिक शब्दकोशों का निर्माण

संसदीय राजभाषा समिति की सिफारिशों के फलस्वरूप मार्च 1960 में ‘केंद्रीय हिंदी निदेशालय’ की स्थापना हुई | इस निदेशालय द्वारा अनुवाद कार्य को बढ़ावा दिया गया, साथ ही अनेक प्रामाणिक शब्दकोशों और विश्वकोशों के निर्माण का कार्य प्रारंभ किया गया | 27 अप्रैल,1960 के आदेशानुसार ‘वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग’ की स्थापना की गई जिसके तहत कृषि, चिकित्सा, मानविकी, समाज-विज्ञान, सूचना तथा प्रसारण, परिवहन, पर्यटन, भौतिकी, रसायन, गणित आदि विषयों की शब्दावलियाँ तैयार की जा चुकी है|    

(7) विभिन्न प्रशिक्षण संस्थान

केंद्रीय सरकार के गृह मंत्रालय ने कर्मचारियों को हिंदी सिखाने के लिए पूरे देश में 175 केंद्रों में हिन्दी प्रशिक्षण की संस्थाएं चलाई हैं | ‘प्रबोध प्रवीण’ और ‘प्रज्ञा’ नाम के पाठ्यक्रम निर्धारित किए | 1973 में सभी मंत्रालयों और विभागों को हिंदी कार्यशालाएँ चलाने के अनुदेश दिए गए | हिंदी के प्रयोग को बढ़ाने हेतु कलकत्ता, मुंबई, चेन्नई, आदि में हिंदी टाइपिंग सिखाने के केंद्र स्थापित किए गए | 1 मार्च 1971 को केंद्रीय अनुवाद ब्यूरो की स्थापना की गई | हिन्दी की अभिवृद्धि और प्रसार में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा |

(8) न्यू मीडिया में हिन्दी का विकास

कम्प्यूटर और इंटरनेट के क्षेत्र में हिन्दी के प्रचार-प्रसार हेतु अनेक साफ्टवेयर और कार्यक्रम नियोजित किए जा रहे हैं | ई. सी. आई. एल. हैदराबाद ने कम्प्यूटर में हिंदी तथा अन्य भारतीय भाषाओं के संबंध में एक प्रोटोटाइप बनाया था | इसके अतिरिक्त अनेक एप्स और हिंदी साफ्टवेयर बनाए जा चुके हैं जो हिन्दी में है और हिंदी के वैश्विक स्वरूप को समृद्ध करते जा रहे हैं | सभी टाइपिस्टों तथा अधिकारियों, कर्मचारियों को हिन्दी टाइपिंग का प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की गई है | आज इंटरनेट और सोशल मीडिया ने हिन्दी का स्वरूप सुदृढ़ बना दिया है | असंख्य सामग्री हिन्दी में उपलब्ध है |

(9) हिन्दी में रोजगार की संभावनाएँ

हिन्दी के स्वरूप को और अधिक विकसित करने हेतु इसे रोजगार से जोड़ना आवश्यक है | वर्तमान में हिन्दी वालों के लिए अनेक रोजगार की संभावनाएं हैं जैसे- पत्रकारिता का क्षेत्र, उच्चतर शिक्षण संस्थानों से लेकर प्राथमिक स्तर पर अध्यापन कार्य, टाइपिस्ट, शोध कार्य, रेडियो और दूरदर्शन पर कार्यक्रम प्रस्तुतकर्ता, साहित्यकार, गीतकार और समाज सेवाओं जैसे (IAS, HAS) आदि में हिन्दी वालों की पहुँच बढ़ती जा रही है | आवश्यकता सिर्फ मानसिकताओं को परिवर्तित करने की है |

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