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बी.ए. तृतीय वर्ष (GE-1)

नारणप्पा का चरित्र चित्रण कीजिए

उपन्यास “संस्कार” में पूरा कथानक नारणप्पा के इर्द-गिर्द ही घूमता रहता है| कोई भी रचना महान एवं महत्वपूर्ण तभी बनती है जब उसमें संघर्ष की स्थिति बनी रहे| यह संघर्ष दो व्यक्तियों के बीच न होकर दो जीवन मूल्यों के बीच हो तो रचना और भी अधिक सशक्त हो जाती है|READ MORE